भारतवर्ष का वर्णन

श्रीहरि ने कहा—हे वृषध्वज! जम्बूद्वीप के मध्यभाग में इलावृत नामक वर्ष है। उस के पूर्व में भद्राश्व तथा उस के पूर्व-दक्षिण (अग्निकोण)-में हिरण्यान् नामक वर्ष है।

मेरु के दक्षिणभाग में किम्पुरुषवर्ष कहा गया है। उस के दक्षिणभाग में भारतवर्ष कहा गया है। मेरु के दक्षिण-पश्चिम में हरिवर्ष, पश्चिम में केतुमालवर्ष, पश्चिमोत्तर में रम्यक और उत्तर में कुरुवर्ष स्थित है, जिन की भू-भाग कच्छपवृक्षा से आच्छादित है।

हे रुद्र! भारतवर्ष को छोड़कर अन्य सभी वर्षों में सिद्धि स्वभाव से ही प्राप्त हो जाती है। यहाँ इन्द्रद्वीप, कसेरुमान, ताम्रवर्ण, गभस्तिमान्, नागद्वीप, कटाह, सिंहल और वारुण नामक आठ वर्ष हैं। नवाँ वर्ष भारतवर्ष है, जो चतुर्दिक् समुद्र से घिरा हुआ है।

इस (भारतवर्ष)-के पूर्व में किरात तथा पश्चिम में यवन देश स्थित है। हे रुद्र! दक्षिण में आन्ध्र, उत्तर में तुरुष्क आदि देश हैं। इस भारतवर्ष में ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य तथा शूद्र-वर्ण के लोग रहते हैं।

यहाँ महेन्द्र, मलय, सह्य, शुक्तिमान्, ऋक्ष, विन्ध्य और पारियात्र—ये सात कुलपर्वत हैं। इस वर्ष में वेद, स्मृति, नर्मदा, वरदा, सुरसा, शिवा, तापी, पयोष्णी, सरयू, कावेरी, गोमती, गोदावरी, भीमरथी, कृष्णावेणी, महानदी, केतुमाला, ताम्रपर्णी, चन्द्रभागा, सरस्वती, ऋषिकुल्या, कावेरी, मन्त्रालया, पद्मिनी, विदर्भा, शतद्रु नामक मुख्य प्रवण करने वाली तथा पापविनाशिनी नदियाँ हैं, जिन के जल का पान मध्यप्रदेशादिक निवासीजन करते हैं।

पाञ्चाल, कुरु, मत्स्य, यौधेय, पटच्चर, पुना तथा शूरसेन देश के निवासी मध्यदेशीय हैं। कोसल, कालिङ्ग, वङ्ग, पुण्ड्र, अङ्ग और विदर्भ-मूलकजनों के देश और विन्ध्यपर्वत के अन्तर्गत विद्यमान देश पूर्व तथा दक्षिण के तटवर्ती भूभाग में स्थित हैं। पुलिन्द, अश्मक, जीमूत, नय राष्ट्र में निवास करने वाले, कर्णाटक, कम्बोज तथा पम्पा—ये दक्षिणापथ भूभाग के निवासी हैं। अन्वक्ष, द्रविड, लाट, कम्बोज, स्त्रीमुख, शक और आनर्तवासी दक्षिण-पश्चिम के निवासी हैं।

सौराष्ट्र, सैन्धव, म्लेच्छ, नास्तिक, यवन, मथुरा तथा निषाद के रहने वाले लोगों के देश पश्चिमी भूभाग में हैं। माण्डव्य, तुषार, मुल्लिका, अश्ममुख, खश, महाकेश, महानास देश उत्तर-पश्चिमी भूभाग में स्थित हैं।

लम्पाक, स्तवमान, गाद्र, बाहिक तथा म्लेच्छ देश हिमालय के उत्तर तटवर्ती भूभाग में स्थित हैं। त्रिगर्त, नील, कोलभ, ब्रह्मपुत्र, मण्डूक, अभीषाह और कश्मीर देश उत्तर-पूर्व-दिशा में अवस्थित कहे गये हैं। (अध्याय ५५)

ज्ञान विवरण

पुस्तक/ग्रंथ: गरुड़ पुराण

विषय: भूगोल