कश्यप प्रजापति तथा अन्य प्रजापतियों की सन्ततियों का वर्णन

श्रीहरि (रुद्रदेव) ने कहा – उत्तानपाद की सुरभि नामक पत्नी से उत्तम और सुनिति नामक भार्या से ध्रुव नामक पुत्र उत्पन्न हुआ, जिसने ध्रुवपद को प्राप्त किया। ध्रुव के महालक्ष्मी और पराक्रमशील स्लिश्ट नामक पुत्र हुआ। उदारमति दिग्गज नामक पुत्र को उत्पन्न किया।

कश्यप प्रजापति की सन्ततियाँ

दक्ष प्रजापति ने अपनी तेरह कन्याओं का विवाह कश्यप के साथ किया, जिनसे देव, दैत्य, नाग और पक्षी आदि की उत्पत्ति हुई।

  • अदिति से आठ वसु और बारह आदित्य (देव) उत्पन्न हुए। आदित्य के नाम हैं: इन्द्र, अंशुमान्, धाता, वरुण, पूषा, विवस्वान्, सविता, मित्र, अर्यमा, भग और त्वष्टा
  • दित्य (दिति) से सत्रह पुत्र उत्पन्न हुए, जिनमें हिरण्यकशिपु और हिरण्याक्ष नाम के दो दैत्य प्रसिद्ध हुए। हिरण्यकशिपु के चार पुत्र हुए: अनुह्राद (प्रह्लाद), ह्राद और संहाद। इनमें प्रह्लाद विष्णुभक्त थे और वामन नामक पुत्र के पिता हुए। विरोचन से बलि और बाण नामक पुत्र उत्पन्न हुए।
  • दनु से उलूक, भुतलायन, महानाभ, महाबाहु आदि तैंतीस पुत्र और तेरह कन्याएँ हुईं, जिनमें शम्बर, शकुनि, कम्बल, तारक और स्वर्भानु (राहु) आदि प्रसिद्ध हैं।
  • विनता से गरुड़ और अरुण नामक दो पुत्र उत्पन्न हुए। गरुड़ ने अपनी माता को सर्पों से मुक्त कराया और विनाशक की शक्ति प्राप्त की।
  • कदम्ब से अनेक सर्प उत्पन्न हुए, जिनमें वासुकि, तक्षक, कालिय और धृतराष्ट्र प्रमुख थे।
  • ताम्र से उलूक, शुक, गृध्र और कबूतर आदि पक्षी उत्पन्न हुए।
  • क्रोधवशा से लताएँ और वृक्ष उत्पन्न हुए।
  • दनु से दानव, अनु से दैत्य, इला से मनुष्य, क्रोधा से वनस्पति आदि और सुरभि से गाय और भैंस आदि उत्पन्न हुईं।

इस प्रकार देव, दैत्य, नाग आदि की उत्पत्ति का यह वर्णन किया गया है।

ज्ञान विवरण

पुस्तक/ग्रंथ: गरुड़ पुराण

विषय: आचारकाण्ड